Friday, 9 January 2026

इज़हार करना आसान नहीं होता | Poetry | Seventeen

 मैं वो करता हूँ, जो काम नहीं होता,

ख़ुद से ही लड़ता हूँ, जब उससे बात नहीं होता।

वो कहती है, “कितना चाहते हो मुझे, बयां कर ही दो,”

मैं कैसे समझाऊँ उसे, इज़हार करना आसान नहीं होता।


हर रोज़ लिखता हूँ उसके लिए कुछ अल्फ़ाज़ नए,

उन अल्फ़ाज़ों में भी सिर्फ़ उसका ही नाम होता।

वो समझ नहीं पाती मेरी ख़ामोश निगाहों को,

मैं कैसे समझाऊँ उसे, इज़हार करना आसान नहीं होता।


कभी मुस्कुरा दूँ, तो उसे लगता है सब ठीक ही है,

पर मेरा दिल जानता है, वो बस दिखावा होता।

वक़्त के साथ सब कुछ कह देना चाहता हूँ,

पर मैं कैसे समझाऊँ उसे, इज़हार करना आसान नहीं होता।

                       

                                                       — Seventeen

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